विकासनगर। पछुवादून में पर्वतीय गांधी इंद्रमणि बडोनी की पुण्य तिथि पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनके सपनों का साकार करने का संकल्प लिया गया। उत्तराखंड क्रांति दल की ओर से डाकपत्थर रोड स्थिति कार्यालय में संगोष्ठी का आयोजन कर प्रदेश की दशा और दिशा पर विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि स्व. बडोनी का जीवन उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। वो आंदोलन के सूत्रधार रहे। अपने त्याग, संघर्ष और दूरदृष्टि के कारण उन्हें ‘उत्तराखंड का गांधी’ कहा गया। उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने कहा कि स्व. बडोनी ने 1970 से ही जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और अस्मिता की रक्षा को अपनी जीवन साधना बना लिया था।उन्होंने उत्तराखंड की अस्मिता को बचाने के लिए शराब विरोध, वन आंदोलन, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और जन-नाट्य मंचों के माध्यम से आम जनता में चेतना का संचार किया। वे सिर्फ एक आंदोलनकारी नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आत्मा की आवाज थे। कहा कि उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन को व्यापक स्वरूप प्रदान किया। आंदोलन के कठिन दौर में जब प्रशासन ने दमन चक्र चलाया, तब भी स्व. बडोनी ने सत्य और अहिंसा के पथ को नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि जिस परिकल्पना से यह राज्य बना था, पर्वतीय क्षेत्रों का विकास, मूलनिवासियों का सम्मान और भ्रष्टाचार से मुक्त शासन, वह लक्ष्य आज धूमिल होता प्रतीत होता है। मूलनिवासी और पर्वतीय क्षेत्र उपेक्षित हैं, भ्रष्टाचार चरम पर है और जनता उस लाभ से वंचित है, जिसकी अपेक्षा अलग राज्य से की गई थी। ऐसे समय में उत्तराखंड को इंद्रमणि बडोनी जैसे सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले और जनसेवा के प्रति समर्पित जनप्रतिनिधियों की जरूरत है। उक्रांद कार्यकर्ताओं ने राज्य की जल, जंगल, जमीन और मूलनिवासियों के अधिकारों की रक्षा और सशक्त, पारदर्शी व स्वाभिमानी उत्तराखंड के निर्माण का संकल्प लिया। इस दौरान वीएस नेगी, मनोज कंडवाल, जय कृष्ण उनियाल, असगर अली, रितु ठाकुर, अनिल पंवार, सौरभ उनियाल, दिनेश डंगवाल, सुरेंद्र बिष्ट, रणजीत सिंह, पूरण प्रसाद भट्ट, सुशील कुमार मौजूद रहे।

