देहरादून। देहरादून जिला पंचायत द्वारा जारी विज्ञापन वसूली और यूनीपोल का ई-टेंडर विवादों में घिर गया है। स्थानीय एजेंसियों और व्यापारियों ने आरोप लगाया कि निविदा की शर्तें छोटे ठेकेदारों को बाहर करने और बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं। उनका कहना है कि दो अलग-अलग कार्यों—विज्ञापन शुल्क वसूली और यूनीपोल किराया—को एक ही निविदा में जोड़ने से हैसियत प्रमाण पत्र की राशि 50 लाख रुपये कर दी गई है, जो स्थानीय व्यापारियों के लिए कठिन है।
व्यापारियों ने निविदा को तत्काल निरस्त करने और अलग-अलग निविदाएं आमंत्रित करने की मांग की। सोमवार को एजेंसी संचालकों ने डीएम कार्यालय और पंचायती राज मंत्री मदन कौशिक को शिकायती पत्र सौंपा। उन्होंने निविदा प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाकर जांच की मांग की। व्यापारियों का कहना है कि निविदा में उत्तराखंड के बजाय अन्य राज्यों के अनुभव को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय स्वरोजगार प्रभावित होगा। साथ ही, प्री-बिड मीटिंग न होने पर विभागीय पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए। कुछ स्थानीय एजेंसियों ने इस मामले को उच्च न्यायालय में भी उठाया है। मंत्री मदन कौशिक ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच का आश्वासन दिया। वहीं, अपर मुख्य जिला पंचायत अधिकारी सतीश त्रिपाठी ने कहा कि ई-टेंडर की अवधि दो साल की है और सभी बदलाव नियमावली के अनुसार किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।

