विकासनगर। आंगनबाड़ी केंद्रों में अब नौनिहालों की पढ़ाई किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। बच्चों को खेल, कहानी, गीत-कविता के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की ओर से शुक्रवारको आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दो दिवसीय जादुई पिटारा का प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान जादुई पिटारा में उपलब्ध विभिन्न शिक्षण सामग्री के उपयोग और बच्चों की उम्र व जरूरत के अनुसार उन्हें गतिविधियों में शामिल करने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षक डॉ. विजय रावत और शशि पोखरियाल ने विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन कर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया। प्रतिभागियों ने स्वयं गतिविधियों में हिस्सा लेकर बच्चों में भाषा विकास, प्रारंभिक गणितीय समझ, रचनात्मकता, सामाजिक-भावनात्मक विकास तथा सूक्ष्म और स्थूल शारीरिक कौशल विकसित करने के तरीके सीखे।कार्यकर्ताओं को स्थानीय परिवेश और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर बच्चों के लिए रोचक गतिविधियां तैयार करने का अभ्यास भी कराया गया। प्रशिक्षण में बताया गया कि प्रारंभिक उम्र में बच्चों का सीखना रटने या पुस्तकों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि खेल, अनुभव और आनंद से जुड़ा होना चाहिए। कार्यक्रम के समन्वयक प्रणय बहुगुणा ने कहा कि जादुई पिटारा आंगनबाड़ी केंद्रों में बाल-केंद्रित और अनुभवात्मक शिक्षण वातावरण तैयार करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। इस दौरान प्राचार्य हेमलता गौड़ उनियाल, टीना मोहन, विजय थपलियाल और अरुण थपलियाल आदि मौजूद रहे।

