Thursday, August 20, 2026
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एनआईए चीफ बन बुजुर्ग कारोबारी को डिजिटल अरेस्ट कर 35.50 लाख ठगे

देहरादून। साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट बता एनआईए चीफ और पुलिस कमिश्नर बनकर पंडितवाड़ी के एक बुजुर्ग कारोबारी को दिल्ली बम धमाके और मनी लांड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर 35.50 लाख रुपये हड़प लिए। रकम अपने दिए बैंक खातों में ट्रांसफर करवा ली। बुधवार को साइबर अपराध पुलिस थाने में इस मामले मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पंडितवाड़ी निवासी 71 वर्षीय राजेंद्र प्रसाद का इलाके में ही आदित्य डिपार्टमेंटल स्टोर है। बीती तीन अगस्त की शाम उनके पास एक कॉल आई। कॉलर ने खुद को देहरादून पुलिस हेडक्वार्टर का इंस्पेक्टर बताते हुए कहा कि उन पर गंभीर आरोप लगे हैं और एनआईए चीफ उनसे बात करना चाहते हैं। जब बुजुर्ग ने उसके दिए गए नंबर पर कॉल की तो दूसरी तरफ मौजूद व्यक्ति ने खुद को एनआईए चीफ बताया। उसने धमकाते हुए कहा कि राजेंद्र प्रसाद पर मनी लांड्रिंग के आरोप हैं और पिछले साल हुए दिल्ली बम धमाके में भी उनकी संलिप्तता पाई गई है। जालसाज ने यह भी कहा कि उनकी आईडी पर आईसीआईसीआई बैंक से दो करोड़ रुपये का लोन लिया गया है जो डिफॉल्ट हो गया है और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हो चुका है। बुजुर्ग को डराने के लिए जालसाजों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल का सहारा लिया। चार अगस्त को हुई वीडियो कॉल में एक ठग बाकायदा पुलिस कमिश्नर की वर्दी में बैठा था। उसके पीछे दीवार पर एनआईए का चिन्ह और अशोक चक्र लगा हुआ था, जिससे वह असली पुलिस अधिकारी का दफ्तर लग रहा था। ठगों ने हिदायत दी कि किसी को इस बारे में बताया तो पुणे हेडक्वार्टर ले जाकर जेल में डाल दिया जाएगा। उन्होंने कई दिनों तक वीडियो कॉल चालू रख कर पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट रखा।
आरबीआई के फर्जी खातों में जमा कराई रकम:
ठगों ने झांसा दिया कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक उनका सारा पैसा आरबीआई के स्पेशल अकाउंट में जमा होगा। जो बाद में क्लीयरेंस होने पर ब्याज सहित वापस मिल जाएगा। ठगों ने आरबीआई के फर्जी लेटरहेड पर बैंक खातों की डिटेल भेजी। डरे-सहमे राजेंद्र प्रसाद ने पहले पांच अगस्त को सेंट्रल बैंक के खाते से 8.50 लाख रुपये विधाता ट्रेडर्स जम्मू ब्रांच के खाते में ट्रांसफर किए। इसके बाद 11 अगस्त को पोस्ट ऑफिस से एफडी तोड़कर 27 लाख रुपये प्रोस्पाइन इंटीरियर्स प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ ब्रांच के खाते में जमा करा दिए। पूरी रकम वसूलने के बाद ठगों ने कहा कि वे जांच पूरी कर खुद संपर्क करेंगे। 13 अगस्त से 16 अगस्त के बीच जब बुजुर्ग ने उन नंबरों पर संपर्क करना चाहा तो कोई जवाब नहीं मिला। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने साइबर अपराध थाने की शरण ली। एसएसपी एसअीएफ अजय सिंह ने बताया कि केस दर्ज कर जांच की जा रही है।

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