देहरादून। चारधाम यात्रा के नाम पर पर्वतीय मार्गों की नियमित रोडवेज बसों को हटाकर यात्रा मार्ग पर भेजने से पहाड़ों में परिवहन संकट बना हुआ है। इसके विरोध में संयुक्त नागरिक संगठन ने परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा और परिवहन आयुक्त बीके संत को पत्र भेजकर कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन के महासचिव सुशील त्यागी ने कहा कि पहाड़ी रूटों पर संचालित सरकारी बसों को बंद कर उन्हें चारधाम में लगाना स्थानीय जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन इसलिए नहीं हुआ था कि यात्रियों की सुविधा के लिए पहाड़ के मूल निवासियों को आवागमन के साधनों से वंचित कर दिया जाए। यह कृत्य राज्य स्थापना की मूल भावना के विरुद्ध है। संगठन ने सुझाव दिया कि जिस प्रकार वीआईपी रैलियों, कुंभ और कांवड़ मेले के लिए निजी बसों का अधिग्रहण किया जाता है, ठीक उसी तरह चारधाम यात्रा के लिए भी निजी कंपनियों से अनुबंध किया जाना चाहिए। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली जैसे पड़ोसी राज्यों के परिवहन निगमों से भी बसें मांगी जा सकती हैं। संगठन ने मांग की है कि जीएमओयॅ और केएमओयू की अतिरिक्त बसें लगाकर व्यवस्था सुधारी जाए, ताकि भीषण गर्मी में पहाड़ के बुजुर्गों, मरीजों और आम जनता को नियमित बस सेवा के लिए तरसना न पड़े।
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