21विकासनगर। जौनसार-बावर में विजयदशमी के अवसर पर बाशिक महासू, पवासी महासू और छत्रधारी चालदा महासू देवता के देवचिह्नों को विधि-विधान के साथ वापस पालकी में विराजमान किया गया। जागरा पर्व के शाही स्नान से शुरू हुई देवचिह्नों के दिव्य दर्शन की परंपरा विजयदशमी के साथ संपन्न हो गई। इस दौरान शेडकुड़िया देवता के भी देवचिह्न एक माह तक श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ पालकी से बाहर रखे गए। महासू देवता की इस परंपरा के तहत वर्ष में एक बार श्रद्धालुओं को देवचिह्नों के नजदीक से दर्शन करने का अवसर मिलता है। जागरा मेले से लेकर विजयदशमी तक दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु देव दर्शन के लिए पहुंचते हैं।श्रद्धालु अपने आराध्य देव के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। छत्रधारी चालदा महासू देवता के निरोडिया ब्राह्मण संत राम डोभाल और राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि जागरा पर्व से विजयदशमी तक देवचिह्न श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बाहर रखे जाते हैं। विजयदशमी पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद देवचिह्नों को पुनः पालकी में विराजमान किया जाता है। इसके बाद अगले 11 महीने तक श्रद्धालु देव पालकी के दर्शन करेंगे। मौके पर वजीर दीवान सिंह राणा, वजीर जयपाल सिंह, जयदत्त नौटियाल, दीवान चंद शर्मा, हरीश चंद्र नौटियाल, भादू राम नौटियाल, भागी राम डोभाल और पुजारी जयदत्त जोशी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

