ऋषिकेश। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने ‘मानवता के रक्षक’ गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस पर भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुये कहा कि वे एक महान शिक्षक, एक उत्कृष्ट योद्धा, विचारक और कवि भी थे, जिन्होंने आध्यात्मिकता, मन, शरीर की प्रकृति और सामाजिक शोषण के विषय में विस्तृत वर्णन किया है। उनके दिव्य विचारों और लेखन को पवित्र ग्रंथ ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ में 116 काव्यात्मक भजनों के रूप में संग्रहित किया गया है। उन्होंने एक ओंकार, प्रतिबद्धता, समर्पण और एक सामाजिक विवेक को सर्वोच्च माना और आदि ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब को शाश्वत गुरु का दर्जा दिया है। परमार्थ निकेतन में डेरा बाबा जलंधर पंजाब से संत श्री शिवनाथ जी, संत श्री गंगोत्री जी और श्री राजेश गिरि जी पधारे उन्होंने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से भेंट का धर्म, संस्कृति और संस्कारों की रक्षा और युवा पीढ़ियों को इन जीवन मूल्यों से पोषित करने हेतु विस्तृत चर्चा की। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने
देशवासियों का आह्वान करते हुये गुरू तेग बहादुर सिंह जी के संदेश सद्भाव, एकता और बंधुत्व आदि जीवन मूल्यों को अपनाने का संकल्प कराते हुये कहा कि गुरु तेग बहादुर सिंह जी ने राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था इसलिये उन्हें हिन्द की चादर कहा जाता है। गुरु तेग बहादुर सिंह जी के बलिदान को सदैव याद किया जाएगा क्योंकि उनका बलिदान समस्त मानवता के लिए था इसलिये उन्हें मानवता का रक्षक भी कहा जाता है। स्वामी जी ने कहा कि गुरू तेग बहादुर सिंह जी ने सामाजिक शोषण से उबारने के लिये भी अद्भुत कार्य किये हैं। उन्होंने सदियों से जमी रूढ़िवादी मानसिकता को बदलने का प्रयास किया। स्वामी जी ने कहा कि सामाजिक शोषण को समाप्त करने के लिये कानूनी एवं नीतिगत स्तर पर कार्य करने से बात नहीं बनेगी, इसके लिये सामाजिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक तथा शैक्षिक स्तर पर कार्य करना होगा और शिक्षा के स्तर पर एक क्रांति लानी होगी। गुरू तेग बहादुर सिंह जी ने ‘सांस्कृतिक आधिपत्य’ की जकड़न समाप्त करने का अद्भुत कार्य किया। आईये आज गुरू तेग बहादुर सिंह जी के शहीदी दिवस के पावन अवसर पर उनकी शिक्षाओं को आत्मसात करने का संकल्प करें।
नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस पर अर्पित की भावभीनी श्रद्धाजंलि
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