देहरादून। महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने शुक्रवार को डीएवी में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को लेकर आयोजित कार्यशाला के दौरान कहा की लिव इन में रहने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करके सरकार ने गलत नहीं किया। बल्कि सही किया है। जो लोग गलत इरादे रखते हैं वो ही इसको गलत बता रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में उत्तराखण्ड में पहली बार महिलाओं के सर्वागीण विकास एवं उत्थान के लिये महिला नीति बनाई गयी है। महिला आयोग के निर्देश पर स्पा सेन्टर हेतु गाइडलाइन्स निर्धारित की गयी है। दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को विधिक सहायता दिलाने के लिए सक्षम अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
उप मुख्य प्रोबेशन अधिकारी अंजना गुप्ता ने उच्चतम न्यायालय की ओर से निर्धारित निर्देशों और कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम 2013 के अनुरूप संस्थानों में गठित आन्तरिक शिकायत समिति के उद्देश्य, यौन उत्पीड़न की परिभाषा के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इसके दिशा-निर्देशों को लागू करने के लिए शक्तियां और जिम्मेदारी की भी जानकारी दी। कालेज प्राचार्य डा. सुनील कुमार कालेज में अनुशासन और सकारात्मक वातावरण बनाये रखने के लिए कालेज प्रशासन एवं विभिन्न समितियों के प्रयासों की सराहना की। साथ ही सभी से अपेक्षा की कि इन मानकों के प्रति सजग रहेंगे। प्रो. शिखा नागलिया और डा. प्रतिमा सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया।
लिव इन में रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता सही, सरकार ने नहीं किया गलत :कुसुम कंडवाल
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