देहरादून। दून के 84 वर्षीय समाजसेवी जय नारायण अग्रवाल इस दुनिया से रुखसत होकर भी जिंदा हैैं। वह अपने नेत्र दान कर गए हैैं। उनकी आंखें किसी जरूरतमंद को रोशनी देंगी। मरने के बाद भी उनकी आंखें दुनिया देख सकेंगी। यही नहीं उन्होंने मानवता की भलाई के लिए अपनी देह भी दान की है।
डांडीपुर, तिलक रोड निवासी जय नारायण अग्रवाल कृषि विभाग से सेवानिवृत्त थे। वह सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन के संस्थापक सदस्य रहे और वर्तमान में प्रचार सचिव थे। सेवानिवृत्ति के बाद वह विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े रहे। साथ ही वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भी सदस्य थे। गुरुवार रात उनका निधन हो गया। वह अपने जीते जी आंखें व देहदान कर गए थे। उनकी इस अंतिम इच्छा के अनुसार स्वजन ने नेत्रदान व देहदान की प्रक्रिया पूरी की। निर्मल आश्रम आई इंस्टिट्यूट की टीम ने उनके घर पहुंचकर नेत्र दान के लिए लिए। इसके बाद दून मेडिकल कालेज में देहदान किया गया। इस दौरान उनकी आत्मा की शांति के लिए गायत्री मंत्र का पाठ किया गया। इस दौरान मेडिकल कालेज के शरीर रचना विभाग के विभागाध्यक्ष डा. एमके पंत, मृतक की पत्नी कुसुम, बेटा आलोक, पुत्रवधु ऋचा, दधिचि देहदान समिति के अध्यक्ष डा. मुकेश गोयल, महासचिव नीरज पांडे आदि उपस्थित रहे। इधर, सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र कृषाली ने कहा कि जय नारायण अग्रवाल का निधन संगठन के लिए एक अपूरणीय क्षति है। समाज के अन्य व्यक्तियों को भी उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।

