देहरादून। गौरव सैनानी एसोसिएशन उत्तराखंड के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाअधिकारी कैम्प कार्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी साहिबा को शिमला बाईपास रोड क्षेत्र की बढ़ती समस्याओं का ज्ञापन सौंपा जिसमें शिमला बाईपास रोड पर सैकड़ों गांव व 25 से अधिक स्कूल व विद्यालय है सुबह से शाम तक स्कूली बच्चों व क्षेत्रवासियों का अत्यधिक आवागमन रहता है और आज ये रोड़ पिछले 10-15 सालों से कोई चौड़ी नहीं हुई लेकिन ट्रैफिक 10 गुना बढ़ गया इस रोड पर डंपर व भारी वाहन 70 से 80 की स्पीड से दौड़ रहे हैं पहले भी कई दुर्घटना में सैकड़ों लोगों ने जान गंवाई है एक बार पहले सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक इन भारी वाहनों पर रोक लगी थी लेकिन अभी ये फिर से स्कूल टाइम पर दौड़ रहे हैं बच्चों को सड़क पार करना भी मुश्किल हो रहा है इसके समस्या के लिए सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक माजरा से व सेलाकुई/धर्मावाला से ही भारी वाहनों को वहीं रोका जाए जो नियम पहले भी था इस समस्या के अलावा शिमला बाईपास रोड पर माजरा से सिंहनी वाला तक छोटे बड़े बाजारों में व्यापारियों द्वारा सड़क किनारे तक भारी अतिक्रमण किया जा रहा है जिससे पार्किंग व फुटपाथ पर चलने वालो को दुर्घटना का खतरा बना रहता है कई बार अतिक्रमण हटाने पर फिर से किसी संरक्षण में अतिक्रमण किया जाता है। शिमला रोड पर जगह जगह पीठ बाजार लगते हैं जो कि रोड़ से नजदीक होने से मुख्यमार्ग पर पार्किंग की जाती है और पूरा यातायात बाधित होकर हर समय जाम की समस्या बनी रहती है इसके लिए पीठ बाजार व पार्किंग की रोड़ से 50 मीटर अंदर ही व्यवस्था की जानी चाहिए। शिमला रोड पर नगर निगम के कूड़े के डंफर कई बार बिना कूड़ा ढके तेज गति से दौड़ रहे हैं और जगह-जगह कूड़ा गिरा देते हैं जिसकी दुर्गंध से क्षेत्रवासियों में बीमारी का खतरा बना रहता है आज गौरव सैनानियों ने जिलाधिकारी साहिबा को विस्तार में शिमला बाई पास रोड की इन गहन समस्याओं से अवगत करवाकर जल्द ही क्षेत्र का मुआयना करके इन समस्याओं को दूर करने के शासनादेश जारी करने का ज्ञापन सौंपा और 1 माह के भीतर इन समस्याओं पर कार्यवाही नहीं हुई तो कोई भी घटना का जिम्मेदार शासन प्रशासन रहेगा और क्षेत्रवासी उस घटना पर विरोध प्रदर्शन भी कर सकते हैं। जिलाधिकारी देहरादून ने सभी समस्याओं पर जल्द ही निवारण हेतु शासनादेश जारी करने को कहा है।इस अवसर पर मुख्यतः एसोसिएशन के अध्यक्ष महावीर सिंह राणा, सचिव गिरीश जोशी, उपाध्यक्ष मनवर रौथाण, बिरेंद्र कंडारी, विक्रम सिंह कंडारी उपस्थित थे।

