देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने शासन-प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए अपने कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की है। शनिवार को केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में महानगर अध्यक्ष प्रबीन चन्द रमोला ने कहा कि जनता के मुद्दों को गंभीरता से लेकर समाधान की दिशा में कदम उठाना शासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कलेक्ट्रेट पर हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो यूकेडी जनांदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा।
रमोला ने आरोप लगाया कि निजी स्कूलों में अवैध शुल्क वृद्धि, शिक्षा के अधिकार में अपात्रों का चयन और शिक्षकों को वेतन न देने जैसे मुद्दों पर जिलाधिकारी के माध्यम से शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा गया था। ज्ञापन की सूचना पूर्व में प्रशासन को दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद दो दिन बाद यूकेडी कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज कर दिए गए। उन्होंने इसे शिक्षा माफियाओं की बौखलाहट और सत्तासीन दल की मिलीभगत करार दिया।
यूकेडी नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज को दबाना संवैधानिक अधिकारों का हनन है। नौकरशाहों को केवल सत्ता के पक्ष में खड़ा होने के बजाय जनता की समस्याओं को सुनना चाहिए। इस अवसर पर महानगर महामंत्री निशिथ मनराल, संगठन मंत्री कपिल कुमार, गिरीश कोठरी, भोला चमोली, गजेंद्र नेगी, राम भट्ट, संतोष नौटियाल, किशोर बहुगुणा, मनोज भट्ट, कामना बिजल्वाण, प्रेम पडियार और दिनेश पंत मौजूद रहे

