उत्तरकाशी। हिमालय में जलवायु परिवर्तन और आपदा के विषय पर अध्ययन यात्रा रविवार को यमुनोत्री से यमुना के जल ग्रहण क्षेत्र से प्रारंभ हुई। इस अध्ययन यात्रा में शामिल सदस्य एनवायरनमेंट और सोशल रिसर्च ऑर्गनाईजेशन के संजय राणा, सुरेश भाई और सर्वोदय कार्यकर्ता विशाल जैन हैं। जिनका यमुनोत्री पहुंचने पर पुरोहितों द्वारा भव्य स्वागत किया गया है। पुरोहित खिलानंद भारद्वाज ने माल्यार्पण करके स्वागत किया। उन्होंने अध्ययन दल के सदस्यों के समक्ष यमुनोत्री क्षेत्र में पिछले लंबे समय से आ रहे मौसमी और पर्यावरणीय बदलाव पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि निश्चित ही अनियमित वर्षा और लगातार चारों ओर के भूस्खलन और बंदरपूछ ग्लेशियर के सिकुड़ने के संकेत बता रहे हैं कि आगे भविष्य में चिंता जनक स्थिति यमुना के उद्गम में भी हैं। लेकिन उनकी आस्था है कि पवित्र यमुना की जलधारा जिस तरह से अविरल बह रही है। हजारों तीर्थ यात्री और पर्यटक हर रोज आ रहे हैं। चारों ओर प्लास्टिक की बोतले और पॉलीथिन यमुना के उद्गम में ही ढेर लगे हुए हैं। अध्ययन दल के सदस्यों ने यहां पर दर्जनों लोगों के इंटरव्यू लेकर पता किया कि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं जो बर्फ पड़ती थी वह गायब हो गई है। यहां गर्मी बढ़ रही है। बरसात में भूस्खलन बड़ी तेजी से हो रहा है। स्थानीय स्तर पर अनेकों लोगों ने बताया कि बड़े निर्माण कार्यों से भी भूस्खलन और बाढ़ की समस्या बढ़ रही है। लेकिन इनमें से कुछ लोगों ने यह भी कहा की चार धाम में आने वाले तीर्थ यात्रियों के हिसाब से सड़क चौड़ीकरण की आवश्यकता है।
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