विकासनगर। दीपावली के जश्न के समापन के बाद शनिवार से पछुवादून में आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत हो जाएगी। शाम को नहाय खाय के साथ व्रती लोगों के घरों में छठ पूजा के पारंपरिक गीत गूंजने लगेंगे। शुक्रवार को सुबह से ही लोग छठ पूजा की तैयारियों में लगे रहे। घरों में साफ-सफाई के साथ ही फलों की खरीदारी की गई। सेलाकुई बाजार में सुबह से ही खरीदारी करने वालों की भीड़ लगी रही। लोगों ने फल, सब्जी के साथ ही पूजा का सामान भी खरीदा। पुराणों में मिलता है छठ पूजा का वर्णन : पुराणों के अनुसार, प्रियव्रत नामक राजा की कोई संतान नहीं थी।
संतान प्राप्ति के लिए महर्षि कश्यप ने पुत्र प्राप्ति यज्ञ करने का परामर्श दिया। राजा को पुत्र तो हुआ, लेकिन मरा हुआ। जब अपने मृत पुत्र को दफनाने के लिए राजा गए, तभी आसमान से ज्योतिर्मय विमान धरती पर उतरा। इसमें बैठी देवी ने कहा मैं सभी बालकों की रक्षिका हूं। इतना कहकर देवी ने बच्चे को स्पर्श किया और बच्चा जीवित हो गया। मान्यता है कि तभी से यह व्रत किया जाता है। सूर्यदेव को प्रकृति की ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। छठी मैया को देवी कात्यायनी का रूप माना जाता हैं। नवरात्र में भी देवी कात्यायनी की पूजा षष्ठी को करते हैं। सनातन धर्म में जन्म के छठे दिन भी देवी कात्यायनी की ही पूजा होती है। इन्हें संतान प्राप्ति के लिए भी प्रसन्न किया जाता है। — छठ से जुड़ी हैं ये मान्यताएं एक धार्मिक मान्यता के अनुसार, छठ की शुरुआत महाभारत काल से हुई थी। इस पर्व को सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्य की पूजा कर शुरू किया था। सूर्य की कृपा से ही कर्ण महान योद्धा बने थे। एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब प्रभु श्री राम रावण वध के बाद अयोध्या लौटे थे, तब ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त होने के लिए माता सीता ने सूर्य भगवान की उपासना की थी। इसके बाद यह पर्व शुरू हुआ।
नहाय-खाय के साथ आज से होगा छठ पर्व का आगाज
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