विकसित भारत हेतु प्रतिरोधक क्षमता निर्माण और नीतिगत पहल का आयोजन होगा 26 एवं 27 सितम्बर को दून विश्वविद्यालय में इस सम्मेलन में विधानसभा अध्यक्ष, माननीय वन, भाषाएँ एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री, हिमालयी राज्यों के दो दर्जन विधायक, पूर्व मुख्यमंत्रीगण, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी तथा 200 से अधिक विषय विशेषज्ञ, किसान और समाजसेवी सामूहिक विचार-विमर्श हेतु सम्मिलित होंगे।”

इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव (IMI) द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में अध्यक्ष श्री रमेश नेगी (सेवानिवृत्त IAS), सचिव श्री रोशन रॉय, कोषाध्यक्ष श्रीमती बिनीता शाह तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के पूर्व निदेशक डॉ. जी.सी. रावत उपस्थित रहे। इस अवसर पर कृषि पत्रकार श्री दिनेश चंद्र सेमवाल भी मौजूद रहे। वार्ता में विभिन्न मीडिया संस्थानों के 24 पत्रकारों ने प्रतिभाग किया।
श्रीमती बिनीता शाह ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया कि IMI, देश के 11 पर्वतीय राज्यों के साथ-साथ असम एवं पश्चिम बंगाल के कुछ पर्वतीय जिलों में विकास कार्यों, कृषि एवं ग्रामीण जीवन से जुड़े मुद्दों तथा नीतिगत पहलों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
अध्यक्ष श्री रमेश नेगी ने 26–27 सितम्बर को आयोजित होने वाले सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में प्रमुख सत्रों के अतिरिक्त छह समानांतर सत्र होंगे, जिनमें जमीनी मुद्दों पर केंद्रित ठोस विषयों पर चर्चा होगी। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही आपदाओं को देखते हुए विकास की दिशा की वैज्ञानिक एवं प्रकृति-सम्मत समीक्षा आवश्यक है।
डॉ. रावत ने बताया कि इस सम्मेलन में पर्वतीय राज्यों और नेपाल से 40 से अधिक विशेषज्ञ कृषि, वन, नदियों और हिमालयी जीवन से जुड़े विषयों पर अपने शोध और विचार प्रस्तुत करेंगे। द्वितीय दिवस पर पर्वतीय राज्यों के लगभग दो दर्जन विधायक आपदा-प्रभावित पहाड़ों पर चिंतन-मनन और विमर्श करेंगे।
सचिव श्री रोशन रॉय ने पूर्वोत्तर भारत के पर्वतीय अंचल से जुड़े मुद्दों पर भी पत्रकारों के साथ अपने विचार साझा किए।
देहरादून। हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन, जल संकट और पारंपरिक कृषि प्रणालियों के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियाँ लगातार मंडरा रही हैं। इन ज्वलंत विषयों पर विचार-विमर्श और समाधान खोजने के उद्देश्य से 12वाँ “सतत् पर्वतीय विकास सम्मेलन”–SMDS-XII) 26–27 सितम्बर 2025 को दून विश्वविद्यालय, डॉ. नित्यानंद सभागार, देहरादून में आईएमआई (इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव -IMI) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
उद्घाटन और समापन सत्र “सम्मेलन का उद्घाटन 26 सितम्बर को प्रातः 10:00 बजे माननीय वन, भाषाएँ एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री सुबोध उनियाल द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर जल-जनित आपदाओं पर विशेष रूप से चर्चा की जाएगी।
सम्मेलन का समापन सत्र 27 सितम्बर को प्रातः 10:30 बजे आयोजित होगा, जिसकी अध्यक्षता उत्तराखण्ड विधानसभा की माननीय अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खंडूड़ी करेंगी। इस अवसर पर माननीय सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।”
आकर्षण का विषय
हाल ही में उत्तराखंड और हिमाचल सहित समूचे हिमालयी राज्यों में जल-त्रासदी के कारण हुई जन-धन हानि को देखते हुए उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और सिक्किम के लगभग दो- दर्जन से अधिक विधायक उक्त चिंतनीय विषय पर गहन विचार-विमर्श और रणनीतिक मंथन करेंगे।
प्रतिभागी और कार्यक्रम
इस दो दिवसीय सम्मेलन में उत्तराखंड और अन्य हिमालयी राज्यों से 200 से अधिक प्रतिभागी — वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, शिक्षाविद, नागरिक समाज के प्रतिनिधि और सामुदायिक कार्यकर्ता — शामिल होंगे। साथ ही प्रदर्शनी और फोटो गैलरी के माध्यम से विषय-वस्तु को सचित्र रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
विभिन्न तकनीकी सत्रों से प्राप्त निष्कर्ष नीति-सिफारिशों और रणनीति-पत्रों के रूप में 16वें वित्त आयोग और नीति आयोग को प्रस्तुत किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र की कृषि-पर्यावरणीय संवेदनशीलता और प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना है।
मुख्य चर्चा विषय:
कृषि-पर्यावरणीय संरक्षण और प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ बनाना; हिमालयी जैव विविधता और कृषि-पर्यावरण; आजीविका, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में बदलते परिदृश्य; हिमालय में जल सुरक्षा और जल-जनित आपदाएँ; जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन, प्रतिरोधक क्षमता और राज्य स्तरीय जलवायु कार्य योजनाएँ; भारतीय हिमालयी क्षेत्र की कृषि-पर्यावरणीय व्यवस्था सुदृढ़ बनाने हेतु वित्तीय समाधान; भारतीय हिमालयी क्षेत्र (IHR) में कार्बन क्रेडिट के अनुभव आदि चर्चा के मुख्य विषय रहेंगे.
साथ-साथ सहभागी संस्थाएँ और साझेदार
सम्मेलन दून विश्वविद्यालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC), राष्ट्रीय हिमालय अध्ययन मिशन, यूकॉस्ट (उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद), उत्तराखण्ड सरकार, जी.बी. पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान (GBPNHE), सी.पी.पी.जी.जी., सस्टेनेबल डेवलपमेंट फोरम उत्तरांचल (SDFU), फॉरेस्ट कोऑपरेटिव ऑफ इंडिया, उत्तराखण्ड सरकार का योजना विभाग, हिमोथान सोसाइटी, सार्ग इंडिया, आईसीआईएमओडी (ICIMOD) तथा अन्य कई साझीदार संस्थाओं के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।”
आईएमआई की पहल
“इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव (IMI) हिमालयी क्षेत्र में सतत विकास और पारिस्थितिकी संरक्षण के लिए कई वर्षों से सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इस पहल में 11 हिमालयी राज्य और 2 केंद्र शासित प्रदेश—जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा और मेघालय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और कालिम्पोंग ज़िले तथा असम के कार्बी आंगलोंग और दीमा हासाओ ज़िले भी इस पहल का हिस्सा हैं।”
आईएमआई द्वारा आयोजित SMDS का इतिहास:
• नैनीताल, उत्तराखंड – 2011
• गंगटोक, सिक्किम – 2012
• ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश – 2015
• लेह, लद्दाख – 2016
• आइज़ोल, मिज़ोरम – 2017
• सोलन, हिमाचल प्रदेश – 2018
• शिलांग, मेघालय – 2019
• देहरादून, उत्तराखंड (ऑनलाइन) – 2020
• दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल – 2021
• लेह, लद्दाख – 2022
• नई दिल्ली – 2023, 2024

