देहरादून। एडवोकेट जितेंद्र कुमार एवं उनकी पत्नी डॉक्टर श्रीमती प्रेम बाला जी ने मृत्यु उपरांत देहदान नेत्रदान एवं अंग दान का संकल्प लिया। श्री जितेंद्र कुमार जी देहरादून बार एसोसिएशन के 1972 में सचिव रहे तथा 1979 एवं 1993 में देहरादून बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे। जितेंद्र कुमार जी मजदूर यूनियन एवं कामगार संघ के प्रताड़ित सदस्यों के वाद और निसहाय महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए उनके वाद निशुल्क कोर्ट में प्रस्तुत किया करते हैं। डॉ प्रेम बाला ने जी एस वी मेडिकल कॉलेज कानपुर के प्रथम बैच में एमबीबीएस किया और वहीं से गायनेकोलॉजी में एम एस किया। इन्होंने जुलाई 1965 से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में लखनऊ से समाज में सेवा देनी शुरू करी तथा जून 1970 में देहरादून महिला चिकित्सालय में स्थानांतरित होकर सेवारत रही। नवंबर 1993 में सीनियर कंसलटेंट महिला चिकित्सालय देहरादून से आप सेवानिवृत्त हुई। इनके एक पुत्री एवं एक पुत्र है। पुत्री एक स्थानीय प्रतिष्ठित स्कूल में सेवारत हैं तथा पुत्र भारतीय सेना में कर्नल के पद पर सेवारत हैं।
आप दोनों की सेवा भावना ही है कि मृत्यु के बाद भी ये शरीर समाज के काम आ सकें अतः दोनो ने जीवन के अंतिम पड़ाव में अपने नेत्रदान, अंगदान,देहदान का संकल्प दधीचि देहदान समिति देहरादून के माध्यम से लिया।

