विकासनगर। लगातार हो रही बारिश से अदरक पर राइजोम रॉट (प्रकन्द सड़न) रोग लगने लगा है। इससे किसान खासे परेशान नजर आ रहे हैं। अदरक की खेती मुख्य रूप से कालसी और चकराता क्षेत्र में की जाती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह बीमारी पीथियम प्रजाति के मृदा-जनित कवक जैसे ही सूक्ष्म जीव से होती है, जो अदरक के प्रकंदों और जड़ों को सड़ा देता है, जिससे पैदावार में भारी नुकसान होता है। रोग की शुरुआत में पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती है और धीरे-धीरे मुरझाकर सूख जाती हैं। पौधे का आधार नरम और पानीदार हो जाता है। प्रकंद भूरे-काले रंग की होकर गलने लगती है, बदबू आने लगती है और अंदर का ऊतक पानी जैसा नरम हो जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार बारिश, खेत में पानी का ठहराव, उच्च तापमान और संक्रमित बीज का उपयोग इस रोग को बढ़ावा देते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के वैज्ञानिक डॉ. भूपेंद्र सिंह खड़ायत ने बताया कि अदरक को रोग से बचाने के लिए लगातार फसल चक्र अपनाया जाना चाहिए। केवल स्वस्थ और रोगमुक्त प्रकंदों का प्रयोग करें। खेत में जल भराव न होने दें। बुआई से पहले, अदरक के प्रकंदों को रीडोमिल या कॉपर आक्सीक्लोराइड (2.5 ग्राम/लीटर पानी) के घोल में 30 मिनट तक डुबोकर उपचारित करें। शुरुआती लक्षण दिखते ही फसल पर एलिएट (1 ग्राम प्रति लीटर) का छिड़काव करें। रोगग्रस्त पौधों को हटा दें। जो किसान अपना बीज स्वयं तैयार करते हैं वे प्रकन्दों से मिट्टी साफ करने के बाद रीडोमिल से उपचार करके ही भंडारण करें।

