देहरादून। नए कानूनी ढ़ांचे में भारतीय ज्ञान प्रणाली को लेकिर उत्तरांचल विवि के लॉ कालेज में सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सोमवार को शुभारंभ हुआ। जिसमें भारतीय न्यायशास्त्र और नए कानूनों की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय न्यायशास्त्र के विशेषज्ञ प्रो शिवदत्त शर्मा ने व कालेज के डीन प्रो. राजेश बहुगुणा ने किया। इसमें देशभर के 130 से अधिक विधि के शिक्षक व शोधकर्ता भागीदारी कर रहे हैं। प्रो. बहुगुणा ने बताया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली पर विधि के शिक्षकों को दक्ष करने के लिए देश के सात विद्वानों को चुना गया है। कार्यक्रम हाईब्रिड मोड में आयोजित होगा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्राचीन भारतीय न्यायशास्त्र के विभिन्न आयामों पर शिक्षकों को दक्ष किया जायेगा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. धर्मबुद्धि ने कहा कि आज जब भारत का सबसे प्राचीन विधि-ग्रन्थ मनुस्मृति देशभर में ज्वलंत डिबेट का विषय है तो भारत के प्राचीन विधिशास्त्र पर आयोजित यह कार्यक्रम सच्चे अर्थों में युक्तियुक्त होगा। प्रो. शिवदत्त शर्मा ने भारतीय मूल्यों का समकालीन सामाजिक व विधिक मुद्दों व चुनौतियों के परिपेक्ष्य में विश्लेषण किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान पर बोलते हुए कहा कि ज्ञान और जानकारी में अंतर है, क्योंकि ज्ञान स्वयं में मंथन करने के उपरांत विचारों की अभिव्यक्ति है। जबकि जानकारी अथवा सूचना ज्ञान के आधार पर लिखी गई बातों से संबंधित है।
इस दौरान प्राचार्या प्रो. पूनम रावत,डा. लक्ष्मी प्रिया विंजामुरी,डा. राधे श्याम झा, जगत नारायण, अमित चौधरी, प्रेरणा कैथोला, अक्षय कुमार, निकुंज सिहं यादव एवं वत्सल चौधरी सहित शिक्षक एवं शोधकर्ता उपस्थित थे।
नए कानूनों को लेकर उत्तरांचल विवि के लॉ कालेज में सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम हुआ शुरू
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