Wednesday, March 25, 2026
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वनाग्नि मामले में विभाग के बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत: रावत

देहरादून। भाजपा के लैंसडौन विधायक महंत दिलीप रावत ने वनाग्नि मामले में वन विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई पर सवाल उठाए। गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर उन्होंने कहा कि वनाग्नि मामले में विभाग के बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में विधायक दिलीप रावत ने कहा कि वनाग्नि के लिए सिर्फ वन विभाग के छोटे कर्मचारियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि विभाग में छोटे कर्मचारियों की लंबे समय से कमी बनी हुई है। उनके पास संसाधनों का भी अभाव है। फायर वाचर को कई बार समय पर वेतन नहीं मिलता। तो कई के पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आग बुझाने के लिए रखे जाने वाले फायर वाचर पर्याप्त नहीं हैं और उनकी सुरक्षा के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। विधायक दिलीप ने कहा कि अंग्रेजों के समय जंगलों को आग से बचाने के लिए फायर लाइन बनाई जाती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं हो पा रहा। इसके साथ ही जंगलों में स्थानीय लोगों की सहभागिता भी पूरी तरह खत्म कर दी गई है। ऐसे में स्थानीय लोगों का भी जंगलों से लगाव नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि वन विभाग में बड़ी संख्या में बड़े अधिकारी हैं जो बंद कमरों में बैठकर जंगल बचाने का काम करते हैं। ऐसे में वनाग्नि मामले में छोटे कर्मचारियों की बजाए बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत है। विधायक ने कहा कि निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई से पूर्व उनकी समस्याओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
विधानसभा सत्र बुलाने की पैरवी
विधायक दिलीप रावत ने कहा कि जंगलों की आग उत्तराखंड के लिए एक बड़ी समस्या है। इसीलिए उन्होंने पूर्व में मुख्यमंत्री व विधानसभा अध्यक्ष से इस मामले में एक विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी। ताकि वनाग्नि व उससे जुड़ी समस्याओं पर चर्चा के साथ ही समाधान भी निकल पाए।

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