देहरादून। 77 वर्षीय अधिवक्ता श्री रिपुदमन भारद्वाज व उनकी धर्मपत्नी श्रीमती विमला भारद्वाज ने निःस्वार्थ भाव से दान परोपकार का सर्वोत्तम स्वरूप मानते हुए दधीचि के जीवन को प्रेरणादायक मानते हुए रक्तदान, नेत्रदान अंगदान तथा देहदान को मानवीय चेतना करार दिया। दधीचि देहदान समिति देहरादून के अध्यक्ष डॉ मुकेश गोयल ने बताया कि श्री रिपुदमन भारद्वाज व उनकी पत्नी ने नेत्रदान, अंगदान, देहदान का संकल्प लिया।वर्तमान में धामावाला निवासी भारद्वाज दम्पति समाजसेवा की भावना को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने यह सँकल्प लिया।
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